Monday, 2 July 2012

जो दिसे सो तो है नहीं

जो दिसे सो तो है नहीं,
है सो कहा न जाई
बिन देखे परतीत न आवे,
कहे न कोई पतियाना
समझ होए तो रबीन चीन्हो,
अचरज होए याना
कोई ध्यावे निराकार को,
कोई ध्यावे आकार
जा बिधि इन दोनों ते न्यारा,
जाने जाननहारा 
वोह राग तो लिखिया न जाई
मात्रा लखे न काना
कहत कबीर सो पड़े न परलय,
सूरत निरत जिन जाना

English Translation

What is seen is not the Truth
What is cannot be said
Trust comes not without seeing
Nor understanding without  words
The wise comprehends with knowledge
To the ignorant it is but a wonder
Some worship the formless God
Some worship His various forms
In what way He is beyond these attributes
Only the Knower knows
That music cannot be written
How can then be the notes
Says Kabir,  awareness alone will overcome illusion

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मोको कहाँ ढूंढेरे बन्दे    
में तो तेरे पास में
न तीरथ में, न मूरत में
न एकांत निवास में
न मंदिर में, न मस्जिद में
न काबे कैलास में
में तो तेरे पास में बन्दे
में तो तेरे पास में
न में जप में, न में तप में
न में बरत उपास में
न में किरिया करम में रहता
नहीं जोग सन्यास में
नहीं प्राण में नहीं पिंड में
न ब्रह्माण्ड अकास में
न में प्रकुति प्रवर गुफा में
नहीं स्वसन की स्वांस में
खोजी होए तुरत मिल जाऊं
इक पल की तलास में
कहेत कबीर सुनो भाई साधो
में तो हूँ विस्वास में

English Translation:

Where do you search me?
I am with you
Not in pilgrimage, nor in icons
Neither in solitudes
Not in temples, nor in mosques
Neither in Kaba nor in Kailash
I am with you O man
I am with you
Not in prayers, nor in meditation
Neither in fasting
Not in yogic exercises
Neither in renunciation
Neither in the vital force nor in the body
Not even in the ethereal space
Neither in the womb of Nature
Not in the breath of the breath
Seek earnestly and discover
In but a moment of search
Says Kabir, Listen with care
Where your faith is, I am there.


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